दिल की चाहत को
लफ्जो से उकेरा है।
ख्वाबो को हकीकत
ख्वाबो को हकीकत
से सजाया है।
अपनी जिन्दगी की
अपनी जिन्दगी की
खास जरूरत बनाकर।
महबुबे मोहब्बत के दिली
महबुबे मोहब्बत के दिली
अरमानो को सजाया है।
बहुत खुबसूरत लक्ष्मी त्रिपाठी जी।
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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