Saturday, 9 July 2016

१७७ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



बाद मुद्दत के अवसर मैंने पाया आज छकूँगा जी भरके हाला
अब न स्वर्ण अवसर मैं गवाऊँगा आज पीयुगा प्याले पे प्याला
अपने साकी का लुत्फ़ उठाऊंगा और नाचूँगा मेरी मधुशाला
जब भी कृतक अवसर पाउँगा आ पहुँचूँगा मेरी अपनी मधुशाला

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव