Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा,
चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Saturday, 9 July 2016
१७७ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ
बाद मुद्दत के अवसर मैंने पाया आज छकूँगा जी भरके हाला
अब न स्वर्ण अवसर मैं गवाऊँगा आज पीयुगा प्याले पे प्याला
अपने साकी का लुत्फ़ उठाऊंगा और नाचूँगा मेरी मधुशाला
जब भी कृतक अवसर पाउँगा आ पहुँचूँगा मेरी अपनी मधुशाला
No comments:
Post a Comment