Friday, 30 November 2012

जिस दिन से मोहब्बत की डगर पे चलने लगा हु


शुभ-प्रभात 
जिस दिन से मोहब्बत की  डगर पे चलने लगा हु
 मै प्यार तुम्हारा पाने को व्याकुळ रहने लगा  हु मै 
चोरी-चोरी /चुपके चुपके तुमसे मोहब्बत  करने लगा हु  मै 
अब तो कृती  गीत  मनोहर अपने ही  साये  से  डरने  लगा हु मै 

उन्नति के पथ पर विजय का पर्याय है दिवस !


दिवस 
1
 एक मौन आमंत्रण है दिवस !
अंधकार पर प्रकाश की  विजय है  ! दिवस !
उन्नति का मार्ग प्रशस्त करताहै  दिवस !
मानव को आंदोलित करता है दिवस !
निशा का आगमन है  दिवस !
संध्या के प्रति समर्पित है  दिवस   !
2
उन्नति  के पथ  पर विजय का पर्याय है दिवस !
परिश्रम को सफल बनाता है दिवस !
प्रभात  का आगाज है दिवस !
सूर्य की  पहली किरण को समर्पित है! दिवस  !
 सूर्य  की  बुलंदी से बधता है दिवस !
संध्या के प्रति समर्पित है  दिवस    !
3
जीवन मे  नया रंग भरता है  दिवस !
जीवन को सार्थक बनाता  है  दिवस !
जीवन मे  रौशनी लाता  है  दिवस !
सूर्यास्त पर ढल  जाता है  दिवस !
अंधेरे के गर्त  मे  खो जाता है  दिवस !
संध्या के प्रति समर्पित है  दिवस     !

महामानव मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम चन्द जी

 

महामानव मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम

1

मर्यादा है गहना उस  महामानव श्री राम का 

पुरूषो में सर्वोत्तम मर्यादा पुरुषोत्तम  महान का 

पितर वचन हित कर दिया अपना  यौवन कुर्बान 

मात महिमा खूब बढाई ,भ्रात प्रेम संदेश दिया 

देखी क्या खूब नियति उस महामानव महान कि  

2

 

जीवन भर संधर्ष अविराम ,दुर्जनो का विनाश किया 

छोटे का करके राजतिलक ,उसका मान बढाया 

 मर्यादा पुरुषोत्तम  महान ने अपना फर्ज निभाया 

राम राम अविराम राम राम ,सारा जीवन संत बिताया 

मर्यादा है गहना उस  महामानव श्री राम का 

आज कलयुगी मानव बहुत बढ गया है

1

आज कलयुगी मानव बहुत बढ गया  है

आज उसका जमीर शायद मर गया  है

इंसानियत का वो खू कर गया  है

अपनी ही जमीर से वो डर गया है

आज कलयुगी मानव बहुत बढ गाय है

                        2

आज कलयुगी मानव बहुत बढ गया है

पतन की गड्ड मे वो गिर गया है

मौत के भय से वो डर गया है

मानवता को वो कुचल गया है

                       3

आज कलयुगी मानव बहुत बढ गया है

खून के रिश्तो का वो कत्ल कर गया है

इन्सानियत के भय से वो डर गया  है

इस युग को अलविदा  क्यो कहे हम

आज कलयुगी मानव बहुत बढ गया है

खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव