Friday, 14 December 2012

501

जब  हाला है अन्दर जाती ,सच को को ढूंढ़ के बाहर लाती !

सत्य जहाँ है बोला जाता ,वह तीर्थ स्थान है पावन मधुशाला !

502

लाख छुपाओ छुपाओं ,छुप नहीं नहीं पाता , हाला से डरकर बाहर आता !

कीन्कांग भी शेर हो जाता जब हाला का पैग है अन्दर जाता !!

503

 दिल दिल का डर है भगाती हाला ,चूहे को भी शेर बनाती !

दो पैग जब अन्दर जाते ,मच्छर सिह भी शेरसिह बनजाते !!

504

दिलों के दू: को हरलेती निश्चिंत बनाती सुमधुर हाला !

खुशियों में चार चाँद लगाती ,दोस्त बनाती मधुशाला !!

505

सांझ ढले जब घर आता ,थकान मिटाती पावन हाला !

सांझ ढले जब  डगर पे  चलता , जा मिलती वह मधुशाला !! 

  


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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव