Tuesday, 4 December 2012

५५५

ईश्वर  की नायाब कारीगरी हो तुम कुदरत का अनुपम उपहार हो

सागर मय से छ्लाकती हला ,मधुशाला का श्रांगार हो !!

५५६

एक तेरे आ जाने से मधुशाला हुई प्रकाश प्ल्लावित

पैमानो  से छ्लकाने लगी हाला ,प्यालो के टकाराने से गुंज उठी मधुशाला !!

५५७

जिस रोज मै निकला डगर मधुशाला ,चहक रही थी मधुशाला

जामो के दौर पे दौर चल  रहे थे ,मचल रही  थी  पैमानो  मे  हाला !!

५५८

नही चाहिये मुझको शाकी तेरी ये मादक हाला

नही चाहिये मुझको शाकी तेरा  मनभावन प्याला !!

559

ले जाओ अपनी हाला  को तुम पास से मेरे

मै पथिक अंजान डगर का ,मै हू राही मतवाला !!

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव