५५५
ईश्वर की नायाब कारीगरी हो तुम कुदरत का अनुपम उपहार हो
सागर मय से छ्लाकती हला ,मधुशाला का श्रांगार हो !!
५५६
एक तेरे आ जाने से मधुशाला हुई प्रकाश प्ल्लावित
पैमानो से छ्लकाने लगी हाला ,प्यालो के टकाराने से गुंज उठी मधुशाला !!
५५७
जिस रोज मै निकला डगर मधुशाला ,चहक रही थी मधुशाला
जामो के दौर पे दौर चल रहे थे ,मचल रही थी पैमानो मे हाला !!
५५८
नही चाहिये मुझको शाकी तेरी ये मादक हाला
नही चाहिये मुझको शाकी तेरा मनभावन प्याला !!
559
ले जाओ अपनी हाला को तुम पास से मेरे
मै पथिक अंजान डगर का ,मै हू राही मतवाला !!
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