Saturday, 22 December 2012

दिल दिल का डर है भगाती हाला ,चूहे को भी शेर बनाती !

 

 दिल दिल का डर है भगाती हाला ,चूहे को भी शेर बनाती !

 501

जब  हाला है अन्दर जाती , 

सच को को ढूंढ़ के बाहर लाती !

सत्य जहाँ है बोला जाता ,

 वह तीर्थ स्थान है पावन मधुशाला !

502

लाख छुपाओ छुपाओं ,छुप नहीं नहीं पाता ,

 हाला से डरकर बाहर आता !

कीन्कांग भी शेर हो जाता  

जब हाला का पैग है अन्दर जाता !!

503

 दिल दिल का डर है भगाती हाला ,

 चूहे को भी शेर बनाती !

दो पैग जब अन्दर जाते , 

मच्छर सिह भी शेरसिह बनजाते !!

504

दिलों के दू: को हरलेती 

निश्चिंत बनाती सुमधुर हाला !

खुशियों में चार चाँद लगाती ,

दोस्त बनाती मधुशाला !!

505

सांझ ढले जब घर आता ,  

थकान मिटाती पावन हाला !

सांझ ढले जब  डगर पे  चलता , 

जा मिलती वह मधुशाला !!   

  


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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव