Thursday, 30 April 2015

जब से बडी है दूरिया मंजिल दूर हि दूर नजर आती है कभी तो सुबह होगी इस इन्तजार मे सारी रात गुजर जाती है

आन्धियो के चलने से परीन्दओ के नीड उजडते है
 बाग मे कालियो के खिलने से भवरो के दिल मचलते है  
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खुद की पराछियो से ही अब वो डरने लगे है 
अपने हाथ मे खंजर लिये  पराछियो से ही लडने लगे है  
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वह ह्वाए जो पूरब से आती है मौसम बदलने का संदेश लाती है 
प्रात:भ्रमण को निकले हम आस पास की रौनके दिल को छू जाती है 
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जब से बडी है दूरिया मंजिल दूर हि दूर नजर आती है 
कभी तो सुबह होगी इस इन्तजार मे सारी रात   गुजर जाती है 
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तेरे इझहारे मोहब्बत से दिल बाग बाग हुआ है। तेरे जुनूने मोहब्बत से एतबारे इश्क सरकार हुआ है।


आज पियेंगे सुरबाला छलकता जाम अधरों से ,तेरे ! तेरे होठ जो छुले साकिया तो मी को भी नशा हो जाये !!

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आज पियेंगे सुरबाला छलकता जाम अधरों से ,तेरे !

तेरे होठ जो छुले साकिया तो मी को भी नशा हो जाये !!

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ये  कोमल कर तेरे सुरबाला और नाजुक सी तेरी कलाई ! 

सागर मय के बोझ से ,मुड ना जाये ये तेरी नाजुक कलाई !1

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मै नित्य ही आता हूँ मधुशाला अपने पागल दिल को बहलाने !

तेरा इझहारे मोहब्बत ही बहुत है जिंदगी को जन्नत बनाने के लिए !1

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जाम को अपने अधरों से लगाकर और भी नशीला कर दो जानम !

कमल सी नाजुक कली से होठ नशीले , छू ले तो मय को भी नशा हो जाये !1

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नशा बोतल में कैद है ,शराब में नहीं मेरी जान 1

जो नशा शबाब में है वो शराब में कहाँ !!

शराब देती है नशा कुछ देर के लिए   !

शबाब का नशा होता है ताउम्र के लिये !!

 

 

आज पथिक के आने पर पर ही ,मेरी बुझेगी प्यास रे !

आज पथिक के आने पर पर ही ,मेरी बुझेगी प्यास रे !

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 मधुशाला  में आज ख़ुशी का आलम है ,हो रही अमृत बरखा चहुओर है !
 घनघोर घटा छाई है , आज मधुशाला में मिलन ऋतू आई है !!
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मधुशाला में बाह पसारे ,स्वागतातुर है बार बालाये आज रे !
साँसे उनकी ठहरी हुई है ,दिल में पथिक आने की है आस रे !!
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आज पथिक के आने पर पर ही ,मेरी बुझेगी प्यास रे !
आज बरसेगी मेघो से हाला और भड़केगी प्यास रे !!
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मैंने दिल से चाहा मधु को ,बड़े प्यार से अंग लगाया !
प्यार से भरकर दामन उसका ,मधु अपना रहबर बनाया !!
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जिस दिन से आई है मयखाने सुरबाला ,तक़दीर बदल गई है मयखाने की !
अब तो रंगत चढ़ आई है फिजा में ,क्या बात कहू मै सुरबाला की 

खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव