बहुत सुन्दर है रचना हमारी
जान से ज्यादा लगती है प्यारी
श्री मुख से जब बाहर आती
कलम से कागज पर दृश्य बनाती
सबके दिलों के दिलो के होश उडाती ।
कृतक प्रेयसी झप्पी पाके महबुबे मोहब्बत को गले लगाती ।
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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