महबुबे मोहब्बत शेरो शायरी की जान होतीं है।
तनहाई आंशिक की बगल मे करवट बदल के सोती है
लब खामोश रहते है मोहब्बत नजरों से बयाँ होती है
लफ्ज दिल से निकलते है कलम माला पिरोती है
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Monday, 6 July 2015
महबुबे मोहब्बत शेरो शायरी की जान होतीं है। तनहाई आंशिक की बगल मे करवट बदल के सोती है लब खामोश रहते है मोहब्बत नजरों से बयाँ होती है लफ्ज दिल से निकलते है कलम माला पिरोती है
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खामोशियो की सागिर्दगी
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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कच्ची कली कचनार की दिलों को खूब भाती है। इसकी मादक महक आशिको का दिल चुराती है। फिजा को महकाती चार चाँद लगाती है। इसकी मादक महक कामदेव का ...
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जो दिल के करीब होता है। वो फकत नसीब से होता है। वक्त किसी का अजीज नही है। कर्म से मानव खुशनसीब होता है। कोई हँसता तो कोई रोता ये कर्मो क...
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