Saturday, 11 July 2015

कुछ दे जाती कुछ ले जाती है जिन्दगी ।

कुछ दे जाती कुछ ले जाती है जिन्दगी ।
कभी हँसती कभी रूलाती है जिन्दगी ।
यु नो जब रब को कृतक अंजान डगर का ख्याल आया।
उसने कायनात मे फुरसत मे हुस्ने यार तुझे मेरे लिये बनाया।
साँझ ढले गगन तले सामने महबुबा को हमने पाया।
सारे जमाने के तनाव को पलक झपकते हमने भुलाया।
तेरी पायल की झन्कार और चुडियो की खनक ने
अंजान डगर के कृतक का दिल क्या खूब लुभाया है
तुमसे मिलकर बेचेन कृतक दिल को करार आया है।
महबुबे मोहब्बत के फलसफे मे एक अदभुद मुकाम पाया है।

No comments:

Post a Comment

खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव