कुछ दे जाती कुछ ले जाती है जिन्दगी ।
कभी हँसती कभी रूलाती है जिन्दगी ।
कभी हँसती कभी रूलाती है जिन्दगी ।
यु नो जब रब को कृतक अंजान डगर का ख्याल आया।
उसने कायनात मे फुरसत मे हुस्ने यार तुझे मेरे लिये बनाया।
उसने कायनात मे फुरसत मे हुस्ने यार तुझे मेरे लिये बनाया।
साँझ ढले गगन तले सामने महबुबा को हमने पाया।
सारे जमाने के तनाव को पलक झपकते हमने भुलाया।
सारे जमाने के तनाव को पलक झपकते हमने भुलाया।
तेरी पायल की झन्कार और चुडियो की खनक ने
अंजान डगर के कृतक का दिल क्या खूब लुभाया है
तुमसे मिलकर बेचेन कृतक दिल को करार आया है।
महबुबे मोहब्बत के फलसफे मे एक अदभुद मुकाम पाया है।
अंजान डगर के कृतक का दिल क्या खूब लुभाया है
तुमसे मिलकर बेचेन कृतक दिल को करार आया है।
महबुबे मोहब्बत के फलसफे मे एक अदभुद मुकाम पाया है।
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