Wednesday, 29 July 2015

राधिकारमण

कान्हा को पाने के लिये श्री राधिका सरकार को मनाना है।
कान्हा की आत्मा श्री राधिका प्यारी है।
राधिकारमण दो जिस्म एक रूह नही।
फकत एक जिस्मो जान की गुढ यारी है।
इसीलिए श्री राधिका हमें जिस्मो जान से प्यारी है।
श्री राधिकारमण के चरणों मे लौ लगाये बैठी
कलयुगी दुनिया सारी की सारी है
हमारे दिल मे श्री राधिकारमण बस्ते है
आपको भी श्री राधिकारमण बहुत प्यारे है।

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव