हुस्न की अदभुद खुमारी छाई है।
उल्फते मोहब्बत रंग लाई है।
गेसु बिखेरे महबुबा महफिल मे आई है।
चंदा की चाँदनी भी तेरे हूस्न से शर्माई है।
उल्फते मोहब्बत रंग लाई है।
गेसु बिखेरे महबुबा महफिल मे आई है।
चंदा की चाँदनी भी तेरे हूस्न से शर्माई है।
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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