सावन के सुहाने मौसम मे प्रिय नग्मे मोहब्बत के गाती है
साँवरी सलोनी कोयलिया की कुहूक सभी का दिल बहलाती है
सावन की रिमझिम फुहारे तन मन मे अगन लगाती है
सावन की रिमझिम फुहारे विरहाग्नी मे महबुबे मोहब्बत भडकाती है
सावन की रिमझिम फुहारे तन मन मे अगन लगाती है
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Saturday, 4 July 2015
सावन के सुहाने मौसम मे महबुबे मोहब्बत के नग्मात सुनाती है
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खामोशियो की सागिर्दगी
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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रात कविता सपने आई देने लगी मोहब्बत की दोहाई पृियतम तोहे नींद कैसे आई तेरी मोहब्बत ने मेरी निंदिया उडाई
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