Monday, 13 July 2015

शायरी करने कीएक बहुत खास वजह होती है। गुरूरे मोहब्बत जन्नते हूर साथ होती है। इबादते इश्क मे दिन यु ही गुजर जाता है मेरे महबुब के पहलू मे मेरे यारो रात ढलती है।

शायरी करने कीएक बहुत खास वजह होती है।
गुरूरे मोहब्बत जन्नते हूर साथ होती है।
इबादते इश्क मे दिन यु ही गुजर जाता है
मेरे महबुब के पहलू मे मेरे यारो रात ढलती है।

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव