Friday, 3 July 2015

चौधवी का चाँद धरा पे आज आया है।उसकी मादक महक ने फिजा को महकाया है।

चौदवी के चाँद ने क्या खूब गजब ढाया है।
राह भटक के मुआ सीधा जमी पे आया है।
दीदारे यार ने दिल मेरा भी चुराया है
लबो पे मचलती मुस्कान ने ढाढस बंधाया है।

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव