जुबा पे अल्फाज मोहब्बत के सुहाने आ गये।
जन्नत से फरिशते यारी निभाने आ गये।
महबुबे मोहब्बत के दिन फिर सुहाने आ गये।
चँदा की चाँदनी मे दिल लुभाने आ गये।
मोहब्बत के गुजरे हुये जमाने आ गये।
हीर और राझणा दास्ताने मोहब्बत दोहराने आ गये।
हमारी यारी के "ए दोस्त" जमाने सुहाने आ गये।
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Wednesday, 29 July 2015
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खामोशियो की सागिर्दगी
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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कच्ची कली कचनार की दिलों को खूब भाती है। इसकी मादक महक आशिको का दिल चुराती है। फिजा को महकाती चार चाँद लगाती है। इसकी मादक महक कामदेव का ...
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जो दिल के करीब होता है। वो फकत नसीब से होता है। वक्त किसी का अजीज नही है। कर्म से मानव खुशनसीब होता है। कोई हँसता तो कोई रोता ये कर्मो क...
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रात कविता सपने आई देने लगी मोहब्बत की दोहाई पृियतम तोहे नींद कैसे आई तेरी मोहब्बत ने मेरी निंदिया उडाई
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