Monday, 13 July 2015

बर्बादी के अंत मे राख बच जाती है राख के ढेर मे छिपी चिन्गारी कोहराम मचाती है। तबाही का सबब ये बन जाती है गुलो गुलजार जहाँ को खाक मे मिलाकर फिर राख नजर आती है।

बर्बादी के अंत मे राख बच जाती है
राख के ढेर मे छिपी चिन्गारी कोहराम मचाती है।
तबाही का सबब ये बन जाती है
गुलो गुलजार जहाँ को खाक मे मिलाकर फिर राख नजर आती है।

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव