बर्बादी के अंत मे राख बच जाती है
राख के ढेर मे छिपी चिन्गारी कोहराम मचाती है।
तबाही का सबब ये बन जाती है
गुलो गुलजार जहाँ को खाक मे मिलाकर फिर राख नजर आती है।
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Monday, 13 July 2015
बर्बादी के अंत मे राख बच जाती है राख के ढेर मे छिपी चिन्गारी कोहराम मचाती है। तबाही का सबब ये बन जाती है गुलो गुलजार जहाँ को खाक मे मिलाकर फिर राख नजर आती है।
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खामोशियो की सागिर्दगी
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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कच्ची कली कचनार की दिलों को खूब भाती है। इसकी मादक महक आशिको का दिल चुराती है। फिजा को महकाती चार चाँद लगाती है। इसकी मादक महक कामदेव का ...
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जो दिल के करीब होता है। वो फकत नसीब से होता है। वक्त किसी का अजीज नही है। कर्म से मानव खुशनसीब होता है। कोई हँसता तो कोई रोता ये कर्मो क...
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