Saturday, 25 July 2015

दोस्ती

एड मी
माय डियर
हिमानी
तेरी शक्ल है
कुछ कुछ
जानी पहिचानी
कवि
मनोहर
यादव
राजिस्थानी
मत कर नादानी
तु हे बड़ी सयानी
लगती नाय अभिमानी
आजा
हम
तुम
मित्र
बन जाये
राजिस्थानी ।

No comments:

Post a Comment

खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव