Wednesday, 22 July 2015

जन्नत की गलियों की सैर

ये बदनाम गलिय नामचीनो के जीने का फकत सहारा ।
इन्हीं गलियों के चलते जिन्दगियो को मिलता किनारा।

यत्र नारी पुज्यते तत्र रमंते देव:सदियों से हमने जाना ।
नारी के सम्मान को सारे जहाँ ने दिल से है माना ।

इन बेमुराद गलियों मे सारे विश्व मे होता व्यापार है।
तन बिकते है मन बिकता नही फिर कयो होते रेप जैसे गलत कार्य है।

इन बदनाम गलियों की औरतों के चलते घरेलू नारिया सेफ है।
वरना आज गुन्डे मवाली बेखोफ करते गलत कार्य ।

नजरों से नूर गायब है चेहरे पे उदासी छाई है।
फिर भी इन गलियों की लड़कियों ने सडको पे नजरें गडाई है।

सदियों से मीना बाजार चलते ही चले जा रहे।
बड़े घरानों के लोग मुजरा सुनते आज भी तन की बोलिया लगा रहे।

चँन्द्रमा की चाँदनी मे इन बाजारों मे हुस्न निखर के आता है।
ग्राहक कपड़ों के माफिक जाँचता परखता बोली हुस्न की लगाता है।

बहुत हँसी है मुन्नी बाई उसकी हरेक अदा का जमाना है दिवाना।
अपने महबुबे मोहब्बत के दिल मे जगह बनाई हे

नरक का सातवॉं दरवाजा खुलता है इन बदनाम गलियों मे।
दरिन्दगी का नंगा नाच होता हरशाम सरेआम है।

No comments:

Post a Comment

खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव