एक था गुल और एक थी बुलबुल
एक था गुल और एक थी बुलबुल, दोनों चमन में रहते थे है ये कहानी बिलकुल सच्ची, मेरे नाना कहते थे बुलबुल कुछ ऐसे गाती थी जैसे तुम बातें करती हो वो गुल ऐसे शरमाता था जैसे मैं घबरा जाता हूँ बुलबुल को मालूम नहीं था गुल ऐसे क्यो शरमाता था वो क्या जाने उसका नग्म़ा गुल के दिल को धडकाता था दिल के भेद ना आते लब पे ये दिल में ही रहते थे लेकिन आखिर दिल की बातें ऐसे कितने दिन छूपती हैं ये वो कलियाँ हैं जो एक दिन बस काँटे बन के चुभती हैं एक दिन जान लिया बुलबुल ने, वो गुल उस का दीवाना है तुम को पसंद आया हो तो बोलू फिर आगे जो अफसाना है एक दूजे का हो जाने पर, वो दोनो मजबूर हुये उन दोनो के प्यार के किस्से गुलशन में मशहूर हुये साथ जियेंगे, साथ मरेंगे, वो दोनो ये कहते थे फिर एक दिन की बात सुनाऊँ एक सय्याद चमन में आया ले गया वो बुलबुल को पकड के और दीवाना गुल मुरझाया शायर लोग बयां करते हैं ऐसे उन की जुदाई की बातें गाते ते ये गीत वो दोनो, सैया बिना नहीं कटती रातें मस्त बहारों का मौसम था आँख से आंसू बहते थे आती थी आवाज़ हमेशा ये झिलमील झिलमील तारोँ से जिसका नाम मोहब्बत है वो कब रूकती है दिवारों से एक दिन आह गुल-ओ-बुलबुल की उस पिंजड़े से जा टकराई टूटा पिंजड़ा, छूटा कैदी, देता रहा सैय्याद दुहाई रोक सके ना उस को मिलके, सारा जमाना, सारी खुदाई गुल साजन को गीत सुनाने, बुलबुल बाग में वापस आई याद सदा रखना ये कहानी, चाहे जीना, चाहे मरना तुम भी किसी से प्यार करो तो, प्यार गुल-ओ-बुलबुल सा करना Related Videos Share on whatsapp Share on facebook Share on twitter Share on email Share on print More Sharing Services Additional Information गीतकार : आनंद बक्षी, गायक : मोहम्मद रफी, संगीतकार : कल्याणजी आनंदजी, चित्रपट : जब जब फूल खिले (१९६५) / Lyricist : Anand Bakshi, Singer : Mohammad Rafi, Music Director : Kalyanji Anandji, Movie : Jab Jab Phool Khile (1965) : Click for more songs Lyrics Submitted By Administrator June 10 2012 geetmanjusha.com © 1999-2014 Manjusha Umesh | Privacy | Community Guidelines
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