जन्नते हूर वसुन्धरा का गुरूर सागरमय का शुरूर
मेरी सरकार नजर आती हो नजर आती हो
सावन के सुहाने मौसम मे दिलों पे गाज गिराती
महबुबे मोहब्बत मोहपास मे फाँसकर बा अदब इष्क फरमाती हो।
चाँद की मादकतम चाँदनी सम अमृत वर्षों कर दिलों के होश उडाती हो
मेरे महबुबे मोहब्बत के मादक हुस्ने यार की चाहत जन्नत की सैर कराती है
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Sunday, 30 August 2015
जन्नते हूर जमीँ का गुरूर
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खामोशियो की सागिर्दगी
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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कच्ची कली कचनार की दिलों को खूब भाती है। इसकी मादक महक आशिको का दिल चुराती है। फिजा को महकाती चार चाँद लगाती है। इसकी मादक महक कामदेव का ...
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जो दिल के करीब होता है। वो फकत नसीब से होता है। वक्त किसी का अजीज नही है। कर्म से मानव खुशनसीब होता है। कोई हँसता तो कोई रोता ये कर्मो क...
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रात कविता सपने आई देने लगी मोहब्बत की दोहाई पृियतम तोहे नींद कैसे आई तेरी मोहब्बत ने मेरी निंदिया उडाई
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