Sunday, 30 August 2015

जन्नते हूर जमीँ का गुरूर

जन्नते हूर वसुन्धरा का गुरूर सागरमय का शुरूर
मेरी सरकार नजर आती हो नजर आती हो
सावन के सुहाने मौसम मे दिलों पे गाज गिराती
महबुबे मोहब्बत मोहपास मे फाँसकर बा अदब इष्क फरमाती हो।
चाँद की मादकतम चाँदनी सम अमृत वर्षों कर दिलों के होश उडाती हो
मेरे महबुबे मोहब्बत के मादक हुस्ने यार की चाहत जन्नत की सैर कराती है

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव