Thursday, 6 August 2015

सुनामी

सुनामी आने पर
वीरान सड़क
सुनशान सड़क
सागर की लहरे शान्त
पेड़ों की पत्तीया शान्त
दरों दीवार शान्त
धरा और अम्बर शान्त
सुनामी ने आते ही
कोहराम मचाया
मानवता का लीलके
दानवता का दृश्य बनाया
चारो और तबाही
और बेहाली ने
साम्राज्य फैलाया
मानवता दम तोड़ चुकी
सुनामी के शेषनाग ने
आज रूह तक को
झकझोर कर हिलाया
वनों को नेस्तोनाबुत कर
धरा को मरू
श्मशान
बनाया है
सुनामी के विभत्स रूप ने
जननत तक को हिलाया
यम भी बौखला गया
उसका कलेजा
मुँह को आया
राईटर तुमने पहले नही बताया
बदहवास वसुन्धरा को
आज एतबार नही आया।

https://m.facebook.com/amritsagarownsms

No comments:

Post a Comment

खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव