सुनामी आने पर
वीरान सड़क
सुनशान सड़क
सागर की लहरे शान्त
पेड़ों की पत्तीया शान्त
दरों दीवार शान्त
धरा और अम्बर शान्त
सुनामी ने आते ही
कोहराम मचाया
मानवता का लीलके
दानवता का दृश्य बनाया
चारो और तबाही
और बेहाली ने
साम्राज्य फैलाया
मानवता दम तोड़ चुकी
सुनामी के शेषनाग ने
आज रूह तक को
झकझोर कर हिलाया
वनों को नेस्तोनाबुत कर
धरा को मरू
श्मशान
बनाया है
सुनामी के विभत्स रूप ने
जननत तक को हिलाया
यम भी बौखला गया
उसका कलेजा
मुँह को आया
राईटर तुमने पहले नही बताया
बदहवास वसुन्धरा को
आज एतबार नही आया।
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