मेहबुबे मोहब्बत ने अश्को को आँखों मे बसाया है
अपने हँसी खाबो की दुनिया का शहंशाह बनाकर
महबुब के खाब पूरे हो जाते है देखने से पहले
जब वो आँखें खोलती है दीदारे यार होता है
महबुब को मंजिले मोहब्बत करीब लगने लगी है
दीदारे यार से पहले महबुब का एतबार प्यार पाया है
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
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खामोशियो की सागिर्दगी
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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