फिजा मे घुली मादक महक
एक गुँजता हुँआ दिलकश नग्मा
कोहीनूर सी लरजती बेबाक नजरें
मरमरी जिस्म गुनाह करने के बेताब दिल
नर्मो नाजुक लबो को चूमने की चाहत
बिन्दास बाहो मे सामने की तमन्ना
ख्वाबो की दुनिया कितनी रंगत लिये
वक्त की मार के आगे बेबस लाचार
मेरी मेहबुब मोहब्बत जो दिल की धडकन
देखते ही शुरूर छा जाना
बेकाबू होती धडकते दिल की धडकन
शमाँ ए मोहब्बत रौशन फकत मेरे महबुब।
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Saturday, 29 August 2015
फिजा मे घुली
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खामोशियो की सागिर्दगी
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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कच्ची कली कचनार की दिलों को खूब भाती है। इसकी मादक महक आशिको का दिल चुराती है। फिजा को महकाती चार चाँद लगाती है। इसकी मादक महक कामदेव का ...
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जो दिल के करीब होता है। वो फकत नसीब से होता है। वक्त किसी का अजीज नही है। कर्म से मानव खुशनसीब होता है। कोई हँसता तो कोई रोता ये कर्मो क...
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रात कविता सपने आई देने लगी मोहब्बत की दोहाई पृियतम तोहे नींद कैसे आई तेरी मोहब्बत ने मेरी निंदिया उडाई
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