कुदरत के कृतक को सजदे मे सर अपना झुकाता हू
उसकी कारिगरी के नायाब हुस्न से रूबरू कराता हू
कुदरत के बाजीगर की कृति का गौर से दीदार किया
कलकल बहती नदियों गुनगुनाते भौरो कुहूकती कोयल से प्यार किया
गगनचुम्भी अट्टालिकाओ का चुम्बन लेते बादलों का दीदार किया
वनों मे स्वछंद विचरण करते स्वर्णिम मृगो का प्यार से दीदार किया
कुदरत ने इन नायाब करिश्मो को मोहब्बत से अपनाया
कलरव करते खग मृग ने कुदरत को खूबसूरती से सजाया
मानता ने आदमियत भुलाके हैवानियत से
रब की कुदरत को बेजार करने का प्लान बनाया ।
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Saturday, 29 August 2015
कुदरत का कृतक
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खामोशियो की सागिर्दगी
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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