Saturday, 29 August 2015

कुदरत का कृतक

कुदरत के कृतक को सजदे मे सर अपना झुकाता हू
उसकी कारिगरी के नायाब हुस्न से रूबरू कराता हू
कुदरत के बाजीगर की कृति का गौर से दीदार किया
कलकल बहती नदियों गुनगुनाते भौरो कुहूकती कोयल से प्यार किया
गगनचुम्भी अट्टालिकाओ का चुम्बन लेते बादलों का दीदार किया
वनों मे स्वछंद विचरण करते स्वर्णिम मृगो का प्यार से दीदार किया
कुदरत ने इन नायाब करिश्मो को मोहब्बत से अपनाया
कलरव करते खग मृग ने कुदरत को खूबसूरती से सजाया
मानता ने आदमियत भुलाके हैवानियत से
रब की कुदरत को बेजार करने का प्लान बनाया ।

No comments:

Post a Comment

खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव