Sunday, 30 August 2015

शाख से टूटकर

शाख से टूटकर पुष्प शोभा जुड़े की बढ़ाता
महबुबे मोहब्बत की याद बनके किताबों मे जगह पाता

खुद शाख से टूटने का दर्द भुलाके औरों की खुशी मे चार चाँद लगाता है
जमाने मे आदमियत को खुश देख पुष्प भी मुस्कराता है

पुष्प टोडने की मनाही किताबों और उपवन मे लिखी होती है
दिल टोडने की मनाही का जिक्र किसी की जुबाँ पे यार नही आता है

यु तो भँवर मोहब्बत हरेक कली से उपवन मे यार जताता है
हरेक कली का पराग चूसके परदेशी भँवर भाग जाता है।

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव