फिजा मे शुमार मादक महक ए शैफाली
तरन्नुम मे गुजँता हुआ हरदिल अजीज नग्मा
कुदरत की अजीम कारीगरी का इन्द्रधनुष बेमिसाल
जननते हूर मरमरी जिस्म कमसिन उर्वशी
खुबसूरत नजरों के चमकते कोहीनूर
बिन्दास जिस्म महकती शबनमी चाँदनी रात
नर्मो नाजुक लाल सुर्ख लब मानो भोर के सूरज के खेलते जजबात
मरमरी बाहो के घेरो मे खेलती जवाँ तमन्ना ये आगोश मे मचलती चाँदनी रात
दिलकश ख्वाब मेरे महबुब के डाले हाथों मे हाथ।
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