Friday, 28 August 2015

मोहब्बत की उल्फत

दिल की बेकरारी खामोशी कै साये
तेरे आगोस मे मेरी मोहब्बत कभी कभी
रात की तनहाईयो मे
प्रेमोन्माद मे अंग प्रत्यंग से झलकती है खुमारी
और आनंदोन्मादित होके
दिमाग मे आती है छवि सहरा की
महबुबे मोहब्बत के करीब
नींद चौकोर की मानिन्द
अनजान खौफ मोहब्बत मे शुमार मेरे महबुब
अपने इष्क का इझहार
खामोशी के आलम मे रात की तनहाईयो मे
मेरे आगोस मे मेरी मेहबुब
तेरे उन्दे यौवन मे मचलते जजबात
मोहब्बत मे गुनाही का सबब फकत
हरेक पल दिल ख्यालो मे मशगूल
मेहबुबे मोहब्बत नही मेरी
जन्नते हूर है मेरे सनम आगोस मे मेरे
और तेरे मरमरी जिस्म शिकारी की पनाह मे
बाद मुद्दत के ये रात आई
अपने जिस्म को हल्का महसूस किया
बेपनाह मोहब्बत का अरमाँ दिल मे
अपनी मोहब्बत के करीब हू मै
मेरे दिल मे उमडते घुमडते बादल
मेरी मोहब्बत है मेरा महबुब
खामोश रात की तनहाईयो मे
मोहब्बत महबुब की उल्फत।

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव