शाख से टूटकर पुष्प शोभा जुड़े की बढ़ाता
महबुबे मोहब्बत की याद बनके किताबों मे जगह पाता
खुद शाख से टूटने का दर्द भुलाके औरों की खुशी मे चार चाँद लगाता है
जमाने मे आदमियत को खुश देख पुष्प भी मुस्कराता है
पुष्प टोडने की मनाही किताबों और उपवन मे लिखी होती है
दिल टोडने की मनाही का जिक्र किसी की जुबाँ पे यार नही आता है
यु तो भँवर मोहब्बत हरेक कली से उपवन मे यार जताता है
हरेक कली का पराग चूसके परदेशी भँवर भाग जाता है।
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