केसर सी महकती साँसे उसकी
भाद्रपद के मेघो से स्याह जुलफे घनियारी
कोयल सा मादक स्वर कोकिला
मरमरी जन्नते हूर कंचन काया मतवारी
हिरनी जैसी चाल अनुपम
रूखसार गुलाबी रंगून मे
नागिन सी बलखाती जुल्फ लगती खूब प्यारी
काश्मीरी रंगत मे बाला
जन्नते हूर भी जाये बलिहारी
कृतक अंजान की मादक कृति
सबके दिलों को लगती प्यारी।
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Thursday, 3 September 2015
केसर सी महकती साँसे
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खामोशियो की सागिर्दगी
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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कच्ची कली कचनार की दिलों को खूब भाती है। इसकी मादक महक आशिको का दिल चुराती है। फिजा को महकाती चार चाँद लगाती है। इसकी मादक महक कामदेव का ...
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जो दिल के करीब होता है। वो फकत नसीब से होता है। वक्त किसी का अजीज नही है। कर्म से मानव खुशनसीब होता है। कोई हँसता तो कोई रोता ये कर्मो क...
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रात कविता सपने आई देने लगी मोहब्बत की दोहाई पृियतम तोहे नींद कैसे आई तेरी मोहब्बत ने मेरी निंदिया उडाई
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