Tuesday, 8 September 2015

बीती शब

बीती शब ख्वाबगाह मे बरसी मोहब्बत और दिल को एतबार हो गया
बेकरार था दिल जिसकी चाहत मे वो मेरे आगोस मे थी और प्यार हो गया
मोहब्बत मे चाहत है चाहत ही मोहब्बत है
पाक परवरदिगार की अजीमो करीम नेमत है मोहब्बत
आज ख्वाबगाह मे मेरे महबुब को पाके ये दिल को एतबार हो गया।

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव