Tuesday, 22 September 2015

महबुब मोहब्बत के दो पल मे जिन्दगी जी ली


  • महबुब मोहब्बत के दो पल मे जिन्दगी जी ली अब मौत भी आ जाये तो कोई गम नही महबुबे मोहब्बत की अमृत घुटटी पी ली मैंने महबुब से मोहब्बत का राज जान लिया मैंने जिन्दगी महबुबे मोहब्बत को दिल से मान लिया मैंने
    तहेदिल से आपका आभार
    हम है आपके शुक्र गुजार आपसे है यारी हमारी अब कवि मनोहर यादव को झेलने के लिये दिली दिमाग से आप अपना मित्र समजाति समझ हो जाईये बिनिता जी दिल से तैयार शिक्षिका है आप और मित्र थाने दार है वफादार जमेगी यारी की बिसात शानदार ।

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव