हम से नाराज क्यो है आज चाँदनी
अंजान हू मै
परेशान हू मै
हमसे नाराज क्यो है आज चाँदनी
मैने तो सोचा ही नही वो भी नाराज होगी
पास उसके धडकता है दिल
उसको भी मोहब्बत की आस होगी
ना जाने दिल मे मेरे ये सब आया ही नही
जो कुछ कहा तुमसे मैने
दिल की बात होगी
नाराजगी छोड भी दो चाँदनी
मैने पलको का शामियाना सजा रखा है
तेरे लिये
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Sunday, 8 November 2015
पलको का शामियाना
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