तेरी मोहब्बत पे यकी दिल से करने लगा हू
सनम तेरी मोहब्बत की चाहत मे जीने लगा हू
मयखाने की मय छोड मोहब्बत की मय पीने लगा हू
मोहब्बते महबूब है सबब ए जिन्दगी यही सोच जीने जीने लगा हू
भुला के जिन्दगी के सारे गम ए सनम मोहब्बत की हाला पीने लगा हू
सैलाभे गम से निकल कर महबूब की धडकन के सहारे जीने लगा हू
महबूब की धडकन से धडकता है नादां ये दिल हमारा
बनाके जिन्दगी का सबब यौवन रस हाला पीने लगा हू
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