Tuesday, 10 November 2015

तेरी मोहब्बत पे यकी दिल से करने लगा हू

तेरी मोहब्बत पे यकी दिल से करने लगा हू
सनम तेरी मोहब्बत की चाहत मे जीने लगा हू
मयखाने की मय छोड मोहब्बत की मय पीने लगा हू
मोहब्बते महबूब है सबब ए जिन्दगी यही सोच जीने जीने लगा हू

भुला के जिन्दगी के सारे गम ए सनम मोहब्बत की हाला पीने लगा हू
सैलाभे गम से निकल कर महबूब की धडकन के सहारे जीने लगा हू
महबूब की धडकन से धडकता है नादां ये दिल हमारा
बनाके जिन्दगी का सबब यौवन रस हाला पीने लगा हू

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव