Saturday, 21 November 2015

जितना दूर तुम

जितना दूर जाओगे सनम उतना ही ज्यादा याद आओगे
रात की तनहाईयो के घनेरे साये बनके तडपाओगे
पल पल हरेक पल याद आओगे तुम जितना दूर जाओगे तुम
जो बस गये हो दिल की अथाह गहराइयो मे कैसे उन्हे भुलाओगे तुम
जो बस गये है ख्वाबो और ख्यालो मे सनम उनको कैसे भुलाओगे तुम
जितना कोशिश करोगे भुलाने की सनम उतना ज्यादा याद आओगे तुम
अपनी यादो से भले भुला दोगे तुम दिल से भुला ना पाओगे सनम
छवि जो बस गयी है तस्व्वुर मे तुम्हारे कैसे भला भुलाओगे सनम

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव