Saturday, 21 November 2015

करते है परवाज परिन्दे

करते है परवाज परिन्दे
आजाद फिजा मे
मचलते है परिन्दे
आजाद फिजा मे
साँझ ढले लौटते है
परिन्दे
अपने जहाज पर
आजाद फिजा से

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव