Tuesday, 10 November 2015

तुम्हारा गीत

आज तुम्हारा गीत सुनकर एतबार दिल को आया है
एक अच्छा दोस्त बडे नसीब से यार हमने पाया है
खुदा की खुदाई पर यकीं आज दिल को आया है
खास मेरे लिये परवरदिगार ने मेरे महबूब तुम्हे बनाया
एक अजीब सी कशिश तुम्हारी आवाज मे हमने पाई है
इतनी मीठी सुरीली आवाज रब की ख्वाहिश से पाई है
जमाने की ख्वाहिश है आवाज तुम्हारी नही सिर्फ तुम्हारी
रब के खातिर न छुपाओ इसे मेरे मेरे यार करो खुद पे यकीं
बहुत सुरीली आवाज दिल को मेरे सनम भाई है

No comments:

Post a Comment

खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव