आमावस्या की स्याह राते बहुत डराती है
एसे मे चाँदनी तुम्हारी बहुत याद आती है
आखिर क्यो मोहब्बत मे ये स्याह राते आती है
तुम्हारी कसम चाँदनी इन काली रातो मे रूह काप जाती है
तनहाईयो मे पवन वेग से आते है काले घनेरे शाये
ऐसे मे महबूबे मोहब्बत तुम्हारी याद दिल को तडपाती है
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Tuesday, 10 November 2015
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खामोशियो की सागिर्दगी
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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रात कविता सपने आई देने लगी मोहब्बत की दोहाई पृियतम तोहे नींद कैसे आई तेरी मोहब्बत ने मेरी निंदिया उडाई
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