Tuesday, 10 November 2015

तेरा अहसान

कैसे तेरा अहसास सनम चुकाउँगा
गमो के सहरा से तुम्हे कैसे उबार पाउँगा
तेरी आँखो मे जो सपने है उनपे एतबार है
जो डगर तेरे दर पहँचे उससे मुझे प्यार है
सहराओ के जंजाल एक बस तुही यार है
बाकी बेकार है यार मेरे
जीना दुश्वार है सनम बिन तेरे
पल पल हरेक पल लगता पहाड है
दिल की हरेक धडकन मे बसी है यार तू
मेरे दिल की हरेक ख्वाहिश दिलदार तू
तेरी मोहब्बत फकत चाहत है चाँदनी
मेरा महबूब दिल मेरी जान है अरमान है
कैसे कटेगे दिन कैसे कटे्गी राते
पल पल हरेक पल याद आती है बीती बाते

No comments:

Post a Comment

खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव