Sunday, 8 November 2015

दीदारे यार

रोज खाब मे चाँदनी दीदार करता हू
रोज अपनी ख्वाबगाह मे इन्तजार करता हू
ख्वाहिशे दिल मे तमाम लियो
उम्मीदो का कारवां बदस्तूर जवाँ
चाँदनी से पहले महक आती है ख्वाब मे
जैसे जनन्त की हूर कोई चाँदनी रात मे
मरमरी जिस्म की मलिका महबूबे मोहब्बत चाँदनी
दीदारे यार से जवां होती है धडकने दिल को
दिल उछलकर बाहर आने को बेकरार
बेचेन उमंगो का महबूब को सजदा बार बार
दिल को करार आता है चाँदनी तेरे दीदार से
जैसे कारवां ने पाई ठौर आज की
तेरे नूर से रौशन है ये जहां
ये धरती ये आसमां
क्या तुम्ही मेरी मंजिल मेरा मुकाम हो
क्या तुम्ही मेरी जिन्दगी की पहली सुब आखिरी शाम हो
क्या तुम्ही मेरी मोहब्बत
जिन्दगी का पहला जाम हो
चाँदनी है जिन्दगी की शाम
भोर जिन्दगी की चाँदनी
आगाज चाँदनी है और अंजाम चाँदनी

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव