रोज खाब मे चाँदनी दीदार करता हू
रोज अपनी ख्वाबगाह मे इन्तजार करता हू
ख्वाहिशे दिल मे तमाम लियो
उम्मीदो का कारवां बदस्तूर जवाँ
चाँदनी से पहले महक आती है ख्वाब मे
जैसे जनन्त की हूर कोई चाँदनी रात मे
मरमरी जिस्म की मलिका महबूबे मोहब्बत चाँदनी
दीदारे यार से जवां होती है धडकने दिल को
दिल उछलकर बाहर आने को बेकरार
बेचेन उमंगो का महबूब को सजदा बार बार
दिल को करार आता है चाँदनी तेरे दीदार से
जैसे कारवां ने पाई ठौर आज की
तेरे नूर से रौशन है ये जहां
ये धरती ये आसमां
क्या तुम्ही मेरी मंजिल मेरा मुकाम हो
क्या तुम्ही मेरी जिन्दगी की पहली सुब आखिरी शाम हो
क्या तुम्ही मेरी मोहब्बत
जिन्दगी का पहला जाम हो
चाँदनी है जिन्दगी की शाम
भोर जिन्दगी की चाँदनी
आगाज चाँदनी है और अंजाम चाँदनी
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Sunday, 8 November 2015
दीदारे यार
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खामोशियो की सागिर्दगी
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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रात कविता सपने आई देने लगी मोहब्बत की दोहाई पृियतम तोहे नींद कैसे आई तेरी मोहब्बत ने मेरी निंदिया उडाई
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