बहुत अच्छा लिखती है चाँदनी
जैसे पूनम का चाँदनी
जैसे महबूब की मोहब्बत
जैसे सोलह सिन्गार
जैसे दिल की धडकन
जैसे आशिको की अनबन
जैसे सागर मे कुमुदनी
जैसे हँसो का जोडा
जैसे उपवन का माली
जैसै महफिल मे कव्वाली
जैसे महबूब का गजरा
जैसे महबूब का महकता हुआ गजरा
जैसे आँखो मे कजरा
जैसे लबो की लाली
जैसे दिल की धडकन
जैसे चँदा की चाँदनी
बहुत खुबसूरत और हसीन महबूबे मोहब्बत
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Tuesday, 10 November 2015
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खामोशियो की सागिर्दगी
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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कच्ची कली कचनार की दिलों को खूब भाती है। इसकी मादक महक आशिको का दिल चुराती है। फिजा को महकाती चार चाँद लगाती है। इसकी मादक महक कामदेव का ...
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जो दिल के करीब होता है। वो फकत नसीब से होता है। वक्त किसी का अजीज नही है। कर्म से मानव खुशनसीब होता है। कोई हँसता तो कोई रोता ये कर्मो क...
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रात कविता सपने आई देने लगी मोहब्बत की दोहाई पृियतम तोहे नींद कैसे आई तेरी मोहब्बत ने मेरी निंदिया उडाई
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