जब आँखो का नीर "अश्क "
रूखसार भिगोता
तब मोहब्बत के मानिंद दिल भी यार रोता है
आँखो के अश्क यार सबको दिखाई देते है
लेकिन दिल के अश्को से दो चार महबूब यार होता है
दिल ही दिल की भाषा से वाकिफ यार होता है
तनहाईयो के आलम दिल ही दिल मे बेकरार दिल यार रोता है
दिल के टूटने का अहसास सिर्फ दिल को ही यार होता है
दिल टूटने पर सैलाभे अश्क महबूब की आँखो से बयाँ होता है.
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Tuesday, 15 December 2015
जब आँखो का नीर
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