कितना हँसी यार रब की महर से पाया है
रब ने अपनी कायनात मे तुमसा यार
मेरे यार सिर्फ
मेरे लिये बनाया है
तुमसे मिलकर दिल के अरमान मचलते है
और गुबारे दिल अल्फाजो की साजिस से छलकते है
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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