सागर की मौजो के लब चुमने को साहिल रहता है बेकरार
सादियो पुरानी है मोहब्बत साहिल से मौजो की मेरे यार
तडपता है मचलता है बहकता है इन्तहा होने पे इन्तजार करता है
बाद मुद्दत के जब दीदारे यार होता है लब चुमता है मौजो का साहिल
हा यही तो मोहब्बत की खुमारी होती है मेरै यार
खिलती हुइ नन्ही कली को देख अंजान भंवर बहक जाता है सरकार
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Tuesday, 15 December 2015
सागर की मौजो
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खामोशियो की सागिर्दगी
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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