Tuesday, 15 December 2015

रब करे

रब करे महबूबे मोहब्बत मुझे भुल जाये
जब दिल से याद वो करे सहराओ मे कमल खिल जाये
बागो मे बहार आये जब महबूबे मोहब्बत मुस्कुराये
सहराओ मे खिली कुमुदनी फिजा खूब महकाये
पतझड की उदासी के बाद जब बागो मे बसंत बहार आये
भँवरो की गुंजन से हरेक कुमुदनी फिजा महकाये
चिडियो की चहचहाअट से भोर का सुरज आये
साँझ ढले गगन तले चाँदनी शबनमी मोतियो से धरा सजाये
पूनम की रात महबूबे मोहब्बत की मादक महक से महकाये
महबूबे मोहब्बत की बाहो मे मोहब्बत का कमल मुस्कुराये

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव