कवि नरेन्द्र सिंह 'मतवाला' भाई
महिलाये माँ बहन हमारी है
महिलाये आदि शक्ति का अवतार धरा पे सारी है
जननी है वह माँ कहलाती है
भार्या बन परिवार का बोझ उठाती है
बहन भाई को कर्त्व्य पथ सिखलाती है
बन चामुण्डा शक्ति रण मे विजय पताका लहराती
माता बनकर पुत्र खिलाती बृहम्चर्य का पाठ पढाती
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Tuesday, 15 December 2015
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खामोशियो की सागिर्दगी
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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कच्ची कली कचनार की दिलों को खूब भाती है। इसकी मादक महक आशिको का दिल चुराती है। फिजा को महकाती चार चाँद लगाती है। इसकी मादक महक कामदेव का ...
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जो दिल के करीब होता है। वो फकत नसीब से होता है। वक्त किसी का अजीज नही है। कर्म से मानव खुशनसीब होता है। कोई हँसता तो कोई रोता ये कर्मो क...
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रात कविता सपने आई देने लगी मोहब्बत की दोहाई पृियतम तोहे नींद कैसे आई तेरी मोहब्बत ने मेरी निंदिया उडाई
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