अम्बर से चाँद खुद ब खुद चलके आया
मेरे महबूब तेरे रूखसार ने गजब ढाया
कनक मे लिपटी तू है कनक या कनक तू
मेरे महबूब अब तलक नही ये समझ आया है
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
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खामोशियो की सागिर्दगी
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