देख सखी मदमस्त फागुन आयो
टेशु पलाश खुशी से झूम रहे
मन मयुन मन ही मन हर्षायों
देख सखी फागुन
द्वारे खड्यो मुस्काओ
एसो जादू बेरी ने डार्यो
मनमीत बहुक याद आयों
पेडों में कोंपलें खिलने लगी
तन बदन अकडायों
माँझी नाँव में डोरी डारत
साँझ ढले पियुघर आयों
देख सखी फागुन ने बिगुल बजायों
भोर भये चकवा ढिंग आयों
पियु प्यार से कपोल चूमत
यौवन अँगडायों
देख सखी फागुन आयों
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Friday, 25 March 2016
देख सखी फागुन आयों
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