Friday, 25 March 2016

जमीं पर रहता हूँ

जमीं पर रहता हूँ आकाश में उडने के दिवा स्वप्न सजाता हूँ
सुना है उपर वाला जहाँ के लोग बनाता है मै उपरवाला बनाता हूँ
धरती का एक अदना सा मानव हूँ मै नहीं अम्बर से टकराता हूँ
सुना है माटी से बनाता है वो इन्साँ को मै माटी से भगवान बनाता हूँ
मानव मात्र के भोजन की व्यवस्था करता है जन्म लेने से पहले
माँ के आँचल में निर्बाोध दूध कायनात का मालिक बनाता है
मै कायनात के मालिक को बेचकर दो जूँन की रोटी यारो कमाती हूँ
परवरदिगार परवरिश करता है चीँटी से हाथी तक की मेरे यारो
नित रब की चौखट पर मनोहर मनसे शीश झुकाता हूँ
नित अपराध मनोहर करता हूँ नित धुनी रमाता हूँ
सजदे मे कायनात के कारीगर के अल्फाजों की माला पहनाता हूँ

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव