Friday, 25 March 2016

आज फिर कलम को अपनी ताकत से जमाने को रूबरू कराना होगा


आज फिर कलम को अपनी ताकत से जमाने को रूबरू कराना होगा
बेहया मिडिया को नकाब हटा जमाने के सामने नंगा लाना होना
अंधो की लाठी और गूँगो का सहारा बन जाना होगा
रिश्वतखोर मिडिया को उसकी औकात याद दिलाना होगा
मिडिया के ब्लेक मेलिंग के धंधे को हर हाल मे रूकवाना होगा
घाघ और बलात्कारी मिडिया से भारतवासियों को बचाना होगा
आज फिर कलम को अपनी शक्ति का अहसास जमाने को कराना होगा
धृतराष्टृ की सी आँखों पर पट्टी बाँध कर बैठे मिडिया को उसकी औकात याद दिलाना होगा
दिलों की मोहब्बत को अजाम तक पहँचाना होगा बेदर्द मिडिया को अँजाम दिखाना होगा
मिडिया को लोकतंत्र की ताकत से रूबरू कराना होगा
कलम को आज फिर तलवार से मैदाने जंग में लड जाना होगा

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खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव